Wednesday, October 12, 2016

भारत में समाचार पत्रों का इतिहास

भारत में पहला समाचार पत्र कम्पनी के एक असंतुष्ट सेवक ‘विलियम वोल्ट्स’ ने 1766 ई. में निकालने का प्रयास किया, लेकिन अपने इस कार्य में वह असफल रहा।
भारत में पत्रकारिता की शुरुआत 29 जनवरी 1780 में हुई जब जेम्स अगस्टस हिक्की ने भारत का पहला अख़बार ‘बंगाल गजट ‘ प्रकाशित किया। हिक्की पत्रकारिता का पिता भी कहा जाता है। हिक्की इस अख़बार में ईस्ट इण्डिया कम्पनी के अफसरों के कार्यों की कड़ी आलोचना करते थे यहाँ की उन्होंने उस वक्त के वायसराय वारेन हेस्टिग्स की पत्नी को भी नही छोड़ा। हिक्की की इन्ही हरकतों से तंग आकर ईस्ट इण्डिया कंपनी ने उन्हें इंग्लैंड वापस भेज दिया।
1780 में ही बर्नाड मैसनिक और पीटर रीड ने मिलकर ‘इण्डिया गजेट ‘ का प्रकाशन शुरू किया।1780 में ही बर्नाड मैसनिक और पीटर रीड ने मिलकर ‘इण्डिया गजेट ‘ का प्रकाशन शुरू किया।इस अख़बार को ईस्ट इण्डिया कम्पनी का समर्थन प्राप्त था।
1784 में तीसरा समाचार पत्र ‘कलकत्ता गजट ‘ या ‘ओरिएंटल एड्वरटाइजर ‘का प्रकाशन शुरू हुआ।
1785 में चौथे समाचार पत्र ‘बंगाल जर्नल ‘ का प्रकाशन थॉमस जेम्स आरम्भ किया। इस अख़बार में सरकारी विज्ञापन मुफ्त में छापे जाते थे। इसी साल ‘मद्रास कुरियर ‘ रिचर्ड जॉनसन द्वरा शुरू किया गया।
1789 में ‘ बाम्बे हेराल्ड’
1790 में ‘ बाम्बे कुरियर ‘ लंकेश बर्नर द्वारा प्रकाशित किया गया। बाद में इसका नाम बदल कर ‘बाम्बे टाइम्स ‘ कर दिया गया । यह पहला अख़बार था जिसमे गुजराती भाषा में विज्ञापन छापते थे।
19 वी शताब्दी में अख़बार
1799 में लार्ड ब्लेजली ने भारत में अखबारों पर सेंशरशिप ( ‘पत्रेक्षण अधिनियम’) लगा दिया। अब किसी भी प्रकाशन को अख़बार छपने के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया। बाद में लोर्ड मिल्टन ने कुछ छुट दे दी। उसी समय 1816 में फिर से बंगाल गजट का गंगाधर भट्टाचार्य ने नेतृत्व में प्रकाशन शुरू हो गया।इसी साल जेम्स मिकेंजी और जॉन वुल ने मिलकर ‘ओरिएण्टल स्टार ‘ नामक समाचार पत्र चलाया जिसे ईस्ट इण्डिया कंपनी ने कुछ ही में दिया।
1818 ई. में ब्रिटिश व्यापारी ‘जेम्स सिल्क बर्किघम’ ने ‘कलकत्ता जनरल’ का सम्पादन किया। बर्किघम ही वह पहला प्रकाशक था, जिसने प्रेस को जनता के प्रतिबिम्ब के स्वरूप में प्रस्तुत किया। प्रेस का आधुनिक रूप जेम्स सिल्क बर्किघम का ही दिया हुआ है।
23 मई 1818 में भारत का पहला दैनिक समाचार पत्र ‘समाचार दर्पण ‘ बंगला में प्रकाशित हुआ। इसके संपादक जे .सी मार्श मेन थे। यह अख़बार उस वक्त एक रूपये में बिकता था। इसी साल एक दूसरा पत्र आया ‘friends of india ‘ इसमें ईसाई मिशिनरी हिन्दू धर्म के कर्म कांडो के बारे में आलोचना किया करते थे।
1821 ई. में बंगाली भाषा में साप्ताहिक समाचार पत्र ‘संवाद कौमुदी’ का प्रकाशन हुआ। इस समाचार पत्र का प्रबन्ध राजा राममोहन राय के हाथों में था। राजा राममोहन राय ने सामाजिक तथा धार्मिक विचारों के विरोधस्वरूप ‘समाचार चंद्रिका’ का मार्च, 1822 ई. में प्रकाशन किया। इसके अतिरिक्त राय ने अप्रैल, 1822 में फ़ारसी भाषा में ‘मिरातुल’ अख़बार एवं अंग्रेज़ी भाषा में ‘ब्राह्मनिकल मैगजीन’ का प्रकाशन किया। जॉन एडम्स द्वारा 1823 ई. में ‘अनुज्ञप्ति नियम’ लागू किये गये। एडम्स द्वारा समाचार पत्रों पर लगे प्रतिबन्ध के कारण राजा राममोहन राय का मिरातुल अख़बार बन्द हो गया।
लॉर्ड विलियम बैंटिक प्रथम गवर्नर-जनरल था, जिसने प्रेस की स्वतंत्रता के प्रति उदारवादी दृष्टिकोण अपनाया। कार्यवाहक गर्वनर-जनरल चार्ल्स मेटकॉफ़ ने 1823 ई. के प्रतिबन्ध को हटाकर समाचार पत्रों को मुक्ति दिलवाई। यही कारण है कि उसे ‘समाचार पत्रों का मुक्तिदाता’ भी कहा जाता है। लॉर्ड मैकाले ने भी प्रेस की स्वतंत्रता का समर्थन किया।
1826 में हिंदी का पहला समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तंड ‘का प्रकाशन युगल किशोर शुक्ल के संपादन में शुरू हुआ परन्तु 18 सितम्बर 1928 में इसको बंद भी करवा दिया गया।
1830 ई. में राजा राममोहन राय, द्वारकानाथ टैगोर एवं प्रसन्न कुमार टैगोर के प्रयासों से बंगाली भाषा में बम्बई से ‘बंगदूत’ का प्रकाशन आरम्भ हुआ। 1831 ई. में गुजराती भाषा में ‘जामे जमशेद’ तथा 1851 ई. में ‘रास्त गोफ़्तार’ एवं ‘अख़बारे सौदागार’ का प्रकाशन हुआ।

1844 में ‘टेलीग्राफ’, 1861 में ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया ‘, 1878 में ‘द हिन्दू’ मासिक पत्र का प्रकाशन हुआ
20वी शताब्दी में अख़बार
1900 में जी .ए . नाटेशन द्वारा मद्रास से’ इंडियन रिव्यु’
1907 में कलकत्ता से रामानन्द चटर्जी द्वारा ‘मोर्डेन रि’व्यू’ का प्रकाशन हुआ।
लॉर्ड कर्ज़न द्वारा ‘बंगाल विभाजन’ के कारण देश में उत्पन्न अशान्ति तथा ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस’ में चरमपंथियों के बढ़ते प्रभाव के कारण अख़बारों के द्वारा सरकार की आलोचना का अनुपात बढ़ने लगा। अतः सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए 1908 ई. का समाचार पत्र अधिनियम लागू किया। इस अधिनियम में यह व्यवस्था की गई कि जिस अख़बार के लेख में हिंसा व हत्या को प्रेरणा मिलेगी, उसके छापाखाने व सम्पत्ति को जब्त कर लिया जायेगा। अधिनियम में दी गई नई व्यवस्था के अन्तर्गत 15 दिन के भीतर उच्च न्यायालय में अपील की सुविधा दी गई। इस अधिनियम द्वारा नौ समाचार पत्रों के विरुद्व मुकदमें चलाये गये एवं सात के मुद्रणालय को जब्त करने का आदेश दिया गया।

1910 ई. के ‘भारतीय समाचार पत्र अधिनियम’ में यह व्यवस्था थी कि समाचार पत्र के प्रकाशक को कम से कम 500 रुपये और अधिक से अधिक 2000 रुपये पंजीकरण जमानत के रूप में स्थानीय सरकार को देना होगा, इसके बाद भी सरकार को पंजीकरण समाप्त करने एवं जमानत जब्त करने का अधिकार होगा तथा दोबारा पंजीकरण के लिए सरकार को 1000 रुपये से 10000 रुपये तक की जमानत लेने का अधिकार होगा। इसके बाद भी यदि समाचार पत्र सरकार की नज़र में किसी आपत्तिजनक साम्रगी को प्रकाशित करता है तो सरकार के पास उसके पंजीकरण को समाप्त करने एवं अख़बार की समस्त प्रतियाँ जब्त करने का अधिकार होगा। अधिनियम के शिकार समाचार पत्र दो महीने के अन्दर स्पेशल ट्रिब्यूनल के पास अपील कर सकते थे।
1913 में बी .जी हर्निमन के संपादकत्व में फिरोजशाह मेहता ने ‘बाम्बे क्रोनिकल’ निकला।
1919 में गाँधी जी ने ‘यंग इण्डिया’ का प्रकाशन शुरू किया। इस पत्र के माध्यम से गाँधी जी अपने राजनीतिक दर्शन ,कार्यक्रम और नीतियों का प्रचार किया करते थे।
प्रथम विश्वयुद्ध के समय ‘भारत सुरक्षा अधिनियम’ पास कर राजनैतिक आंदोलन एवं स्वतन्त्र आलोचना पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। 1921 ई. सर तेज बहादुर सप्रू की अध्यक्षता में एक ‘प्रेस इन्क्वायरी कमेटी’ नियुक्त की गई। समिति के ही सुझावों पर 1908 और 1910 ई. के अधिनियमों को समाप्त किया गया। 1931 ई. में ‘इंडियन प्रेस इमरजेंसी एक्ट’ लागू हुआ। इस अधिनियम द्वारा 1910 ई. के प्रेस अधिनियम को पुनः लागू कर दिया गया। इस समय गांधी जी द्वारा चलाये गये सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रचार को दबाने के लिए इस अधिनियम को विस्तृत कर ‘क्रिमिनल अमैंडमेंट एक्ट’ अथवा ‘आपराधिक संशोधित अधिनियम’ लागू किया गया।
1924 में’ हिन्दुस्तान टाइम्स’ का प्रकाशन शुरू हुआ।
1933 में गाँधी जी ने’ हरिजन ‘ समाचार पत्र को प्रकाशित किया। इसे अलग अलग भाषाओ में प्रकाशित किया गया था।
1942 में झाँसी से दैनिक जागरण का प्रकाशन शुरू हुआ। बाद में 1947 से यह कानपुर से प्रकाशित होने लगा।
मार्च, 1947 में भारत सरकार ने ‘प्रेस इन्क्वायरी कमेटी’ की स्थापना समाचार पत्रों से जुड़े हुए क़ानून की समीक्षा के लिए किया।
1958 में दैनिक भास्कर का प्रकाशन शुरू हुआ। इसे पहली बार भोपाल और ग्वालियर से एक साथ प्रकाशित किया गया था।

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